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Balivaishvadev Yagya kit – बलिवैश्वदेव यज्ञ किट

Balivaishvadev Yagya – बलिवैश्वदेव यज्ञ

पञ्च महायज्ञों में चौथा स्थान ‘बलिवैश्वदेव यज्ञ’ का है। इसका उद्देश्य नि:सहाय, दीन-दुखियों एवं जीव-जन्तुओं को भोजन देना है... और ध्यान रहे आपका ये कृत्य आपके परिवार की खुशियों का कारन बन सकता है , ऐसा करने वाले को आजीवन अन्न की कमी नहीं होती.

 

क्या आप इस परम्परा से जुड़े हैं ? नहीं ! जुड़ना चाहते हैं तो हम आपको अत्यंत सहजता से इससे जोड़ेंगे    

क्या करना है : पाकशाला (Kitchen) में जो भोजन बने, उसमें से खट्टा नमकीन और क्षार-प्रधान अन्न को छोडक़र शेष अन्न से रसोई की अग्नि में अथवा कुण्ड में निम्नलिखित मन्त्रों से १० आहुतियाँ प्रदान करें। मन्त्र बोलेन तो उत्तम और मन्त्र नहीं बोलना चाहें या ना बोल पाएं तो ॐ विष्णवे स्वाहा के साथ आहुति दे सकते हैं..ये भी न बोलना चाहें तो बिना बोले आहुति दे दें। 

इसके बाद पशु-पक्षी, कीट, पतङ्ग एवं दीन-दुखियों के लिए खाद्य पदार्थों में से कुछ भाग निकालकर उन्हें खिलाना चाहिए। भारत में आज भी भोजन से पहले गौ के लिए रोटी निकाली जाती है। कुत्ते, कौवे आदि को रोटी डालना, चींटियों के बिलों पर आटा डालना आदि कर्म ‘बलिवैश्वदेव यज्ञ’ के ही रूपान्तर है

 

इस विधि के लिए हम आपको एक छोटा सा किट देंगे जो पूरे माह आपको इस विधि से जोड़ेगा ... जिसकी कुल कीमत होगी मात्र Rs . २५१ (फ्री शिपिंग)

 

जिसमें होगी १ वेदी , ३० घी बत्ती , ३० गौमय कुंड

 

इसका प्रयोग कैसे करने ये देखने के लिए निम्न लिंक पर क्लिक कर समझें और आर्डर करने हेतु लिंक २ पर क्लिक करें या इस नंबर पर संपर्क करें - 7710096258

 

 

Available In

Description:

१० मन्त्र

 

ॐ अग्नये स्वाहा ।।१।।

 

 

 

 

ॐ सोमाय स्वाहा ।।२।।

 

 

 

 

ॐ अग्नीषोमाभ्यां स्वाहा ।।३।।

 

 

 

 

ॐ विश्वेभ्यो देवेभ्य: स्वाहा ।।४।।

 

 

 

 

ॐ धन्वन्तरये स्वाहा ।।५।।

 

 

 

 

ॐ कुह्वै स्वाहा ।।६।।

 

 

 

 

ॐ अनुमत्यै स्वाहा ।।७।।

 

 

 

 

ॐ प्रजापतये स्वाहा ।।८।।

 

 

 

 

ॐ सहद्यावापृथिवीभ्यां स्वाहा ।।९।।

 

 

 

 

ॐ स्विष्टकृते स्वाहा ।।१०।।

मन्त्रों के अर्थ

मैं ज्ञान स्वरूप ईश्वर के लिए यह आहुति प्रदान कर रहा हूँ।

मैं सुख व शान्ति स्वरूप ईश्वर के लिए यह आहुति प्रदान कर रहा हूँ।

मैं ज्ञान स्वरूप और सुख शान्ति स्वरूप ईश्वर के लिए यह आहुति प्रदान कर रहा हूँ।

मैं संसार के प्रकाशक ईश्वर के लिए आहुति प्रदान कर रहा हूँ।

मैं मुक्ति प्रदाता और रोग हर्त्ता ईश्वर के लिए यह आहुति प्रदान कर रहा हूँ।

मैं आश्चर्यजनक शक्ति के भण्डार ईश्वर के लिए यह आहुति प्रदान कर रहा हूँ।

मैं अद्भुत चिति शक्तियुक्त ईश्वर के लिए यह आहुति प्रदान कर रहा हूँ।

मैं प्रजा के पालक ईश्वर के लिए यह आहुति प्रदान कर रहा हूँ।

मैं द्युलोक व पृथिवी लोक में व्याप्त ईश्वर के लिए यह आहुति प्रदान कर रहा हूँ।

मैं इष्ट सुख प्रदाता ईश्वर के लिए यह आहुति प्रदान कर रहा हूँ।

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