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अंतिम संस्कार में जब चिता जल रही होती है और दाह संस्कार पूरा होने वाला होता है, तब सभी लोग पंच लकड़ी (पवित्र गोवर पंचगव्य व तुलसी ) चिता में डालते हैं। इसके पीछे धार्मिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक तर्क हैं। ( दुर्भाग्यपूर्ण है कि आजकल अंतिम संस्कार की सामग्री बेचने वाले 90% साधन नकली बेचते हैं जो अंतिम संस्कार की अंतिम विधि को भी अपवित्र कर देते हैं)
_👇राजनांदगाव अनुसन्धाकेंद्र के माध्यम से इस विधि की पवित्रता हेतु पंच लकड़ी तैयार की गयी है ताकि मृतआत्मा को मोक्ष मिल सके_
1. गौमाता पंचगव्य ( दूध,दहि,घृत,गो वर,गोमूत्र)
वैतरणी पार कराने वाली गौ माता के पांचों गव्यों के प्रभाव से निश्चित ही मृतआत्मा की दुर्गति से रक्षा होती ही है।
2. तुलसी पंचांग (तुलसी पत्ते,जड़,बीज,तना,फूल)
मृतक की सद्गति व नारकीय योनि से मुक्ति के लिये समर्पित किया जाता है।
3.मौली बंधन
मधुर संबंधों व मजबूत रिश्ते का प्रतीक जो, म्रृत व्यक्ति के प्रति अपने आत्मीय संबंधों के चलते उसे समर्पित किया जाता है।
Description:
🔥पंचलकड़ी की आहूति संबंधित धार्मिक कारण
अग्नि को आहुति देना
यह हिंदू परंपरा में एक प्रकार की अंतिम आहुति (offering) मानी जाती है, जिससे दाह संस्कार की प्रक्रिया पूर्ण होती है।
मृत आत्मा को विदाई देना यह क्रिया यह दर्शाती है कि परिवार और समाज के सभी सदस्यों ने मिलकर मृत व्यक्ति को अंतिम विदाई दी।
पंच तत्वों में विलीनता पवित्र पंचलकड़ी डालने का अर्थ यह भी है कि मृत शरीर अग्नि के माध्यम से पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश में पूरी तरह विलीन हो जाए।
👉पंचलकड़ी संबंधीत आध्यात्मिक और भावनात्मक कारण
परिजनों का अंतिम स्पर्श यह मृत्यु के प्रति स्वीकृति और मृतक के प्रति सम्मान प्रकटकरने की एक क्रिया मानी जाती है।
मृत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना जब पंचलकड़ी डाली जाती है, तब लोग अपने मन में मृतक के लिए शांति और मोक्ष की कामना करते हैं।
सामूहिक विदाई यह दर्शाता है कि मृतक अकेला नहीं जा रहा, बल्कि पूरा समाज उसे प्रेम,सम्मान व सद्गति के लिए अंतिम यात्रापर पवित्र पंचलकड़ी देकर विदा कर रहा है।
👉पंचलकड़ी डालने संबंधित वैज्ञानिक कारण
चिता की जलने की प्रक्रिया को पूर्ण करना कभी-कभी चिता में अशुद्धियां/त्रुटियां हो जाती है जिसे पवित्र पंचगव्य व तुलसी पंचांग के प्रभाव से ठीक किया जाता है।कभी मृत शरीर का कुछ भाग ठीक से नहीं जलते, इसलिए भी सभी लोग पंचलकड़ी डालते हैं ताकि अग्नि पूरी तरह से अपना कार्य कर सके।
पर्यावरण संतुलन परंपरागत रूप से इस्तेमाल की जाने वाली पंचलकड़ी पवित्र तुलसी व गोबर के उपले आदि जैविक पदार्थ होते हैं, जो जलने के बाद पर्यावरण को पवित्र/शुद्ध करते हैं। हानिकारक वायरस व रेडियेशन रोधी होते हैं।
🔥निष्कर्ष
अंतिम संस्कार में चिता में पंचलकड़ी डालना सिर्फ एक रस्म नहीं, बल्कि धार्मिक, आध्यात्मिक, वैज्ञानिक और भावनात्मक कारणों से जुड़ी एक महत्वपूर्ण परंपरा है। यह क्रिया मृत आत्मा को अंतिम सम्मान देने, अग्नि को आहुति देने और समाज के सामूहिक सहयोग का प्रतीक मानी जाती है।
मॉं पंचगव्य चिकित्सा एवं गोरक्षा अनुसंधान केन्द्र, राजनांदगांव छत्तीसगढ़ पिन 491441
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(एकात्मता गौमय उत्पाद )